आसमान का घोड़ा

विश्व की प्रगति में घोड़े का अहम योगदान रहा है। जब रेल इंजन नहीं बना था और सामान ढोने का कोई और जरिया नहीं था तब घोड़ा ही था जो यह जिम्मेदारी बखूबी निभाता था। इसमें मारवाड़ी घोड़ा बेहद दमदार माना जाता है। महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक भी मारवाड़ी नस्ल का था।  दैनिक भास्कर ने जोधपुर संस्करण के स्थापना दिवस पर पत्रिका प्रकाशित की थी। पत्रिका में मैंने मारवाड़ी घोड़े पर एक छोटा पीस लिखा था। लेख पर जाने से पहले आइये चेतक पर लिखी श्यामनारायण पांडे की शानदार कविता का रस लेते हैं। इससे पता चल जाएगा कि मारवाड़ी घोड़ा कितना दम-खम रखता है।

रणबीच चौकड़ी भर-भर कर
चेतक बन गया निराला था
राणाप्रताप के घोड़े से
पड़ गया हवा का पाला था

जो तनिक हवा से बाग हिली
लेकर सवार उड़ जाता था
राणा की पुतली फिरी नहीं
तब तक चेतक मुड़ जाता था

गिरता न कभी चेतक तन पर
राणाप्रताप का कोड़ा था
वह दौड़ रहा अरिमस्तक पर
वह आसमान का घोड़ा था

था यहीं रहा अब यहां नहीं
वह वहीं रहा था यहां नहीं
थी जगह न कोई जहां नहीं
किस अरि मस्तक पर कहां नहीं

निर्भीक गया वह ढालों में
सरपट दौडा करबालों में
फँस गया शत्रु की चालों में

बढते नद सा वह लहर गया
फिर गया गया फिर ठहर गया
बिकराल बज्रमय बादल सा
अरि की सेना पर घहर गया।

भाला गिर गया गिरा निशंग
हय टापों से खन गया अंग
बैरी समाज रह गया दंग
घोड़े का ऐसा देख रंग

नसान ने बहुत से जानवरों को उनकी उपयोगिता और समझ के अनुसार अपना साथी बनाया है। इनमें पहला स्थान है घोड़े का। यात्रा में, जंग में, खेल में, चौकसी में शिकार में हर महत्वपूर्ण कार्य में घोड़े ने अपनी दमदार उपस्थिती दर्ज कराई है। दुनिया की प्रगति में घोड़ा अहम किरदार निभाता रहा है। यहां तक कि विज्ञान ने भी हॉर्स-पॉवर तक का फार्मूला घोड़े की ताकत से प्रभावित होकर ही लिया है।

घोड़े की उत्कृष्ट नस्लों में से एक है मारवाड़ी घोड़ा 

घोड़े की कई नस्लें हैं। इनमें एक ताकतवर और दमदार नस्ल है मारवाड़ी। यह विश्व में घोड़े की उत्कृष्ट नस्लों में से एक है। यह खूबसूरत घोड़ा प्राचीन अरब-तुर्कमेनिस्तान की मिश्रित नस्ल की उत्पत्ति है और इसका विकास मारवाड़ क्षत्र के रेगिस्तान में हुआ है।

घुड़दौड़ व शिकार में अपनी सफलता का लोहा मनवाया

जंग-ए-मैदान में अपनी उपयोगिता सिद्ध करने के अलावा इस शानदार नस्ल ने घुड़दौड़ व शिकार में भी अपनी सफलता का लोहा मनवाया है। मध्ययुगीन राजस्थान की शौर्य गाथाओं में यह नस्ल केंद्र में रही है। एक उत्तम घोड़ा प्राय: पृथ्वी पर भगवान के सन्निकट माना जाता रहा है। इसकी सवारी विशेष रूप से राजपूत याेद्धा ही करते थे क्योंकि तब कोई और इसके योग्य नहीं था। राजपूतों विशेषकर राठौड़ों ने ताकतवर, विशाल अश्वरोही सेना गठित कर रखी थी जिसका यशगान होता था कि यह जंग में कभी मैदान नहीं छोड़ती है। मारवाड़ी घोड़ा विजय के पश्चात, अपने घायल सवार योद्धा को सुरक्षित निकालने के लिए या खुद के घायल होने पर मौत के अंदेशे के बाद ही युद्ध के मैदान से बाहर आता था। मारवाड़ी घोड़े की वीरता व रणक्षेत्र में बहादुरी के किस्से पौराणिक हैं और आज भी भावना उत्तेजित करने वाले हैं।

चेतक की बहादुरी का इतिहास गवाह है

मारवाड़ी घोड़े की वीरता का सबसे अच्छा उदाहरण है महाराणा प्रताप का स्वामीभक्त घोड़ा चेतक। मुगलों के खिलाफ हल्दी घाटी की लड़ाई में घायल होने पर भी चेतक अपने स्वामी को सुरक्षित निकाल लाया था और फिर अपने प्राण त्याग दिए थे। परंपारा के अनुसार महाराणा ने बाद में अपने महाप्रतापी घेाड़े की याद में स्मारक बनवाया था। कहा भी जाता है कि घोड़ा सबसे पुराना और वफादार साथी है। लोक कथाओं में घोड़े की वफादारी के रोमांचकारी किस्से भरे पड़े हैं।

तेज गर्मी हो या सर्दी मारवाड़ी घोड़ा नहीं थकता   

मारवाड़ी घोड़े की एक और खासियत है कि यह रुक्ष मौसम में पलता है, लेकिन तेज गर्मी व सर्दी दोनोंं में रहने में सक्षम है। यह बहुत सहनशील भी है। इसके खुर काफी सख्त व मजबूत होते हैं। पूर्ण अनुपातों व चलने के अपने विशेष अंदाज के कारण ही यह घोड़ों में पाई जाने वाली विशेषताओं का बेहतरीन व शानदार उदाहरण है। मारवाड़ी घोड़े की लंबाई 14 से 17 हाथ होती है। द्ढ़तापूर्वक अपने स्वामी के प्रति वफादारी, बहादुरी व सुंदरता कहीं भी किसी भी परिस्थिति के अनुरूप स्वयं को ढालने के गुणों के कारण ही मारवाड़ी घोड़ा पूरे विश्व में अश्व प्रेमियों में खासा लोकप्रिय है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है इसके खास तरह के कान जो अंदर की तरफ घूमकर छोर पर मिलते हैं। कान घोड़े की तुलना में घोड़ी के बड़े होते हैं तथा ये 180 डिग्री तक घूम सकते हैं।

इससे उसे अच्छी तरह सुनने में तो मदद मिलती ही है, रेगिस्तानी तूफान से सुरक्षा में भी खासी मदद मिलती है। दिल्ली व पंजाब पुलिस, राष्ट्रपति के अंगरक्षकों द्वारा व सशस्त्र सेनाओं में मारवाड़ी घोड़े का उपयोग किया जा रहा है।

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