शान से इठलाता है मास्टरजी का पेटीबाजा

संगीत और इश्क के सिवा दुनिया में कुछ भी नहीं। बात जब वाद्य यंत्रों की हो तो म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स का बेस हारमोनियम ही माना जाता है। साथ ही यह गरीब का बाजा भी है। आप किसी भी गांव में चले जाएं, किसी चौपाल पर संगीत की महफिल सजी हो स्थानीय वाद्य यंत्रों के साथ आपको हारमोनियम जरूर मिलेगा। इसी हारमोनियम पर मैंने साल 2009 में नई दुनिया में हारमोनियम पर लिखा था।


नोरंजन के सैकड़ों सुलभ साधनों व नए तकनीकी वाद्य यंत्रों के प्रसार के बावजूद सदियों का सफर तय करने वाला हारमोनियम आज भी अपनी जगह न केवल बरकरार रख सका है बल्कि शान से अपने सुरों का जादू बिखेर रहा है।

हारमोनियम के बिना अधूरा है शास्त्रीय संगीत

शास्त्रीय संगीत तो जैसे हारमोनियम के बिना अधूरा ही है। हारमोनियम के आविष्कार से पहले शास्त्रीय संगीत में तानुपरा और सारंगी उपयोग में लाए जाते थे। फिर हारमोनियम के सुरों ने जो कमाल दिखाया कि सुनने वालों को इसका जैसे चस्का लग गया। तब से हारमोनियम का स्थान कोई और वाद्ययंत्र न ले सका।

गजल, भजन व कव्वाली के हर बड़े कलाकार को हारमोनियम के साथ गाते हम वर्षों से देखते आए हैं। इसी से पता चलता है कि हारमोनियम इनके लिए कितना उपयोगी है। वर्षों पहले हारमोनियम को पेटी बाजा और बजाने वाले या इसके उस्ताद को मास्टरजी के नाम से जाना जाता था। गांव में तो आज भी पेटी बाजा के बिना संगीत महफिलें अधूरी मानी जाती हैं। एक जमाना था जब संगीत के शौकीन अपना शौक पूरा करने के लिए जर्मनी से हारमोनियम मंगवाते थे।

कल्याणजी का रास्ता स्थित श्री कल्याण म्यूजिक स्टोर के मुकेश शर्मा के अनुसार 150-200 हारमोनियम हर माह जयपुर में बिकते हैं। करीब डेढ़ दशक पहले तक एक माह में 15-20 हारमोनियम ही बिक पाते थे।

दो तरह का होता है हारमोनियम 

स्कूलों में सुबह होने वाली प्रार्थना, जयपुर के आस-पास लगने वाली चौपालों, संगीत की महफिलों विशेषकर भजनों, कव्वालियों में हारमोनियम इस्तेमाल होता है। शर्मा के अनुसार हारमोनियम दो तरह का होता है। एक फोल्डिंग और दूसरा स्टैंडिंग। यह 15, 000 से 60, 000 रुपए तक का आता है। गीतांजलि कंपनी का हारमोनियम सबसे महंगा होता है।

जयपुर में 15000 रुपए तक का हारमोनियम आसानी से मिल जाता है। हारमोनियम एक से पांच लाइन तक का आता है। यह केल व देवदार की लकड़ी का बनता है। सुर, रीड, बोर्ड, नॉयलॉन, कश्ती, बैजू, पंख, धौंकनी, वैली लगाकर बक्सा तैयार किया जाता है।

पीतल के 39 पातों से सारेगामापदनिसा की धुन तैयार की जाती है। जयपुर में हारमोनियम की रिपेयरिंग का काफी काम होता है। शर्मा बताते हैं कि जयपुर में हारमोनियम की रिपेयरिंग का काम प्रमुख रूप से बाबा हरिश्चंद्र मार्ग स्थित बाबूलाल जांगिड़, स्टेशन रोड स्थित दौलतराम एंड संस तथा श्री कल्याण म्यूजिक स्टोर पर होता है। हारमोनियम खरीदने के बाद आप निश्चिंत हो जाइए क्योंकि चार-पाचं साल तक इसका कुछ नहीं बिगड़ता।

ऐसा बना लोकप्रिय  

अमेरिका में 1989 तक हारमोनियकम के बारे में लोग नहीं जानते थे। अब तो पॉल सिमोन, टॉम पैटी जैसे गायकों की रिकॉर्डिंग में होरमोनियम भी बज रहा है। कव्वाली के नुसरत फतेह अली खान, भजन गायक कृष्णदास जैसे कलाकारों ने इसे काफी लोकप्रिय बनाया। 

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