मर्ज बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की

हम दवा स्वस्थ होने के लिए लेते हैं, लेकिन दवा लेने के बाद भी बीमारी बढ़ जाए तो क्या हो। ऐसा इसलिए कि बाजार में ऐसी दवाएं धड़ल्ले से चल रही हैं जिन पर सालों से प्रतिबंध लगा हुआ है। तो मरीज इनका सेवन क्यों कर रहे हैं? क्या हैं इसके कारण। इसी की पड़ताल में पता चला कि बाजार में ऐसी कई दवाएं चल रही हैं जो बैन हो चुकी हैं। (यह 2009 में नई दुनिया में प्रकाशित हुआ था।)

मर्ज बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की

क मशहूर शेर है – मर्ज बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की। शेरो शयरी तक ही इसका असर रहता तो कोई बात नहीं थी पर बात तो रोगी की जिंदगी से ताल्लुक रखने वाली है। जी, हां कोई दवा जिसे हम मर्ज मिटाने या स्वस्थ होने के लिए ले रहे हैं कदाचित मर्ज को बढ़ा तो नहीं रही। इस बात को अच्छी तरह जांच परख लेना चाहिए। कोई भी दवा बिना डाक्टर की सलाह के न तो लेनी चाहिए और न ही उसे लंबे समय तक चलाते रहना चाहिए। वरिष्ठ फिजीशियन एवं सर्जन डा.एसजी काबरा के अनुसार कुछ दवाएं शुरू-शुरू में मरीज को लाभ तो पहुंचाती हैं, लेकिन उनकाे लंबे समय तक लेने पर विपरीत असर दिखाई देने लकता है। इन दवाओं के प्रति सावधानी रखने की आवश्यकता है। कुछ एलोपैथिक दवाएं विदेशों में प्रतिबंधित हैं लेकिन भारत में इन पर प्रतिबंध नहीं है जैसे कोल्ड, एक्शन 500 और निमुलिडा। ये दवाएं निशिद्ध योग्य हैं यानी इन पर प्रतिबंध लगना चाहिए।

नियम-कानून हैं पर पालना नहीं

वस्तुस्थिति यह है कि दवाओं के वितरण, निर्माण, प्रिसक्रिप्शन, उपयोग आदि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ड्रग्स एडं कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 बना हुआ है। इसमें 1982 में संशोधन कर हानिकारक दवाओं को निष्क्रय करने का अधिकार भी जोड़ दिया गया। डा. काबरा के अनुसार दवाओं के निर्माण एवं तितरण की निषिद्धता को लागू करने का दायित्व औषण नियंत्रका का है। ये दवाएं स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही हैं। अत: यह आवश्यक है कि औषण नियंत्रक मीडिया या किसी अन्य माध्यम से लोगों को इस बारे में जागरूक करें। इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स से रोगी बच नहीं पाता। इसे लापरवाही ही कहा जाएगा कि इन निषिद्ध योग्य दवाओं का कारोबार काफी फल-फूल रहा है।

इनका कहना है

करीब-करीब सभी दवाओं का निर्माण विदेशों में होता है। भारत में एक निश्चित प्रक्रिया के बाद संतुष्ट होने पर केंद्र सरकार इन्हें जारी करती है। फिर भी अगर किसी दवा से होने वाले नुकसान की जानकारी मिलती है तो सरकार इस पर प्रितबंध लगा सकती है। दवा जारी करने और प्रतिबंध लगाने का काम केंद्र सरकार का है। – डा. के शृंगी, औषध नियंत्रक (राजस्थान)

केमिकल नेम   ब्रेंड नेम     किस लिए दी जाती है    विदेशों में प्रितबंध के कारण

1  एनलजिन  –  नोवलजिन – दर्द निवारक, इससे खून बनना बंद हो जाता है – अरक्कतता के कारण इसका सेवन अस्थमज्जा को नष्ट कर देता है। मौत हो सकती है।

सिसेप्राइड –  सिजा सिप्राइड – पेट में जलन, कब्ज के लिए-  इससे हृदय की लय लड़खड़ा जाती है। कुछ क्षणों के लिए हृदय बंद होता है तो यह घातक साबित हो सकती है।

3  डोपेररिडोल – डोलरोल – अवसादनाश के लिए- हृदय की लय लड़खड़ाना।

4  फ्यूराजोलिडोन – फ्यूराेक्सोन, लोमोफाेन दस्त रोकने के लिए कैंसरकारक।

निमेसुलाइड–  नाइस, निमुलिड दर्दनाशक, बुखार, यकृत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है, विशेषकर बच्चों को।

6  नाइटोप्यूराजोन – प्यूरासिन -रोगाणुनाशक, कैंसरकारक।scan-5.jpg

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