ख्वाबों के काफिले

तुमसे मिलने को नींद की रौ में
ख्वाबों के काफिले निकलते हैं
बरसती धूप में दहकते सेहरा से
बेधड़क धड़ा-धड़ निकलते हैं
कड़कड़ाती बिजलियों-बरसात में
शानो शौकत अजीमों शान से
तुमसे मिलने को नींद की रौ में
ख्वाबों के काफिले निकलते हैं
आंधियों की अंधी मार में
जलती हुई नारंगी शाम में
चक्रवाती तूफानी स्याह काली रात में
तुमसे मिलने को नींद की रौ में
ख्वाबों के काफिले निकलते हैं
तुम मिलो न मिलो यह मुकद्दर की बात है
पर मैं यह काफिला रोक दूं यह नागवार बात है

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